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Tuesday, August 28, 2018

the hidden power in human-3 short inspirational stories in hindi/इन्सान की छुपी हुए शक्तियाँ

                           

एक बार एक motivational Speaker एक स्कूल में छात्रों को speech देने पहुचें, वे छात्रों को इन्सान के अंदर छुपी हुए शक्तियों के बारे में बताने वाले थे,

वे बोले हर व्यक्ति में चाहे वह कोई भी हो, कोई बच्चा हो या बड़ा, अमीर हो या गरीब, शहर में रहता हो या गाँव में, उसमे आंतरिक शक्तियाँ होतीं हैं, आपने कई बार महसूस किया होगा की कोई काम आप नहीं कर पाएंगे लेकिन जब आपको वह काम करना अनिवार्य हो जाये तो आप उसे बहुत ही अच्छे से कर पायें होंगे,

ऐसी ही कुछ कहानियों के माध्यम से मैं आपको समझाना चाहता हूँ की किस प्रकार हमारी छुपी हुई शक्तियां सही समय पर हमारे काम आती हैं,


1.पहली कहानी--

एक छात्र सौरभ जो स्टेज पर जाने से काफी डरता था, किसी स्टेज पर जाकर कुछ बोलना तो उसके लिए असम्भव सा था, वह कभी नहीं सोच सकता था की वह किसी स्टेज पर जाकर कुछ बोल पायेगा, ऐसी कल्पना से ही वह डर जाता था कोई उसे आगे स्टेज पर जाने को न बोल दे इसलिए वह लाइन में पीछे बैठता था,

एक दिन स्कूल में कोई प्रोग्राम चल रहा था, कुछ अध्यापकों व अन्य लोगों ने अपने विचार रखे, अब एक शिक्षक छात्रों के नाम से उन्हें स्टेज पर बुला रहे थे और उन्हें अपने विचार रखने के लिए कह रहे थे, सौरभ इस बात से निश्चिन्त था की उसका नाम नहीं आएगा क्योंकि उसने अपना नाम स्टेज के लिए दिया ही नहीं है,

लेकिन 2 छात्रों के बाद अचानक शिक्षक ने सौरभ का नाम पुकारा, पहले तो उसे लगा की किसी और को बुलाया जा रहा है लेकिन जब उसने देखा सब लोग उसी की तरफ देख रहें हैं, तो वह हडबडा गया, उसे समझ नहीं आया की उसे क्यों बुलाया जा रहा है,

शिक्षक के बार बार उसका नाम बुलाने से उसे उठना पड़ा, और जैसे तैसे करके वह स्टेज पर पहुंच गया, वह डरा हुआ था लेकिन किसी तरह उसने खुद के डर को नियंत्रित किया, और अपने अनुभव के अनुसार बोलने लगा, जैसे ही उसने बोलना सुरु किया सारे लोग उसे ध्यान से सुनने लगे, जब उसने अपनी बात खत्म की तो उसके लिए खूब तालियाँ बजने लगीं, उसे खुद में यकीन नहीं था की वह इतना अच्छा बोल सकता है, शिक्षकों द्वारा उसकी खूब तारीफ की गई, और अन्य छात्र भी उसकी सराहना कर रहे थे,

उसके अंदर वह शक्तियां पहले से मौजूद थीं, की वह स्टेज पर न सिर्फ बोल सकता है बल्कि बहुत अच्छा बोल सकता है, लेकिन उसके डर ने कभी उन शक्तियों को बाहर नहीं आने दिया, लेकिन जब उसके लिए यह करना अनिवार्य हो गया तो उसकी शक्तियां खुल के बाहर आई और वह वो काम कर गया जिसकी किसी ने उम्मीद भी नही की थी.

2. दूसरी कहानी--

राहुल नाम का एक बच्चा काफी डरपोक किस्म का था, हर कोई उसे डरपोक डरपोक कहकर चिढाता था, हर चीज में उसका डर साफ़ दीखता था, कोई उम्मीद नहीं कर सकता था की वह किसी भी तरह के डर का सामना कर सकता है,

एक दिन वह अपनी छोटी बहन के साथ स्कूल जा रहा था, रास्ते में उसकी बहन पर भालू ने हमला कर दिया, भालू उसकी बहन को मार ही डालता, लेकिन राहुल ने बड़ी बहादुरी दिखाते हुए भालू का सामना किया उसने अपनी बहन को पीछे धकेलकर खुद भालू को भगाने लगा उसने एक डंडा उठाया और भालू पर प्रहार कर दिया, उसकी हिम्मत देख भालू पीछे हट गया और वहाँ से भाग गया, जब लोगों ने उसके बारे में सुना तो उसकी खूब तारीफ हुई, बाद में उसे स्कूल से वीरता पुरस्कार दिया गया.

 हिंदी कहानी, खुद की नजरों में विजेता कैसे बने



3. तीसरी कहानी--

एक अन्य वाक्ये के अनुसार एक लड़का कई बार एक 7 फीट की दीवार को पार करने का प्रयास करता था लेकिन कभी भी वह उसे पार नहीं कर पाया, एक दिन वह उस दीवार से कुछ दूरी पर था, की अचानत उसे अहसास हुआ की एक जर्मन सैफर्ड कुत्ता उसकी तरफ गुस्से में तेजी से दौड़ता हुआ आ रहा है, उसके पास कहीं भी भागने की जगह नहीं थी सिवाय उस 7 फीट की दीवार को पार करने के अलावा,

उसके पास ज्यादा सोचने का भी टाइम नहीं था तो उसने बिना ज्यादा समय गवाएं, तेजी से भागना सुरु किया और अपनी पूरी शक्ति से वह दीवार लांघने में कामयाब हुआ, वह कुत्ते से बचके जहाँ काफी खुश था वहीं उस दीवार को लांघकर काफी आश्चर्यचकित.

हमारी छुपी हुई शक्तियां हमारी जरूरत के समय हमारे काम आती हैं यदि हमें इन छुपी हुई शक्तियों का अहसास हो जाये तो हम इनका इस्तेमाल करके खुद के बड़े से बड़े लक्ष्यों को भी हासिल कर सकते हैं,

winner-best motivational/inspirational story in hindi, खुद की नजरों में विजेता कैसे बने



आपने Nick Vujicic का नाम सुना होगा,वो ऑस्ट्रेलिया के रहने वाले हैं, निक का जन्म बिना हाथ पैरों के हुआ था, बिना हाथ पैरों के किसी इन्सान को कितना संघर्ष झेलना पड़ सकता है, इसका अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता,


बचपन से ही निक को बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ा, स्कूल में सारे बच्चे उसपर हंसते थे, उसकी अपंगता का मजाक उड़ाते थे, कोई उससे दोस्ती नहीं करता था, बचपन से ही निक तनाव में रहने लगे थे, कोई बच्चा अपने हंसने खेलने की उम्र में इतना असहाय था की उसने तनाव में आकर 11 साल की उम्र में आत्महत्या करने की भी कोशिस की,


जैसे जैसे निक बड़े हो रहे थे उन्होंने खुद के जीवन के उद्देश्य के ढूँढना सुरु किया,उन्होंने खुद पर विश्वास करना सुरु किया, उन्हें अहसाह हुआ की उनके जीवन का भी बहुत महत्व है, उन्होंने अपनी आंतरिक शक्तियों को पहचाना और खुद को बेहतर बनाने में उसका इस्तेमाल किया.

निक आज दुनिया के सबसे बेहतर motivational स्पीकर में से एक हैं, वे बहुत ही अच्छे स्वीमर और लेखक हैं, वे कई स्पोर्ट्स भी खेलते हैं,

आज निक लोगों को motivate करते हैं, उन्हें जिन्दगी में आगे बढने के लिए प्रेरित करते हैं, वो कहते हैं उम्मीद खोना, हाथ पांव खोने से ज्यादा बुरा है,

अब वो शादीशुदा हैं और उनके 2 बच्चे भीं हैं, वे अपनी जिन्दगी से खुश और संतुष्ट है,



कोई भी समस्या इतनी बड़ी नहीं हो सकती जो आपको आगे बढने से रोक सके, आपके अंदर उन सब समस्याओं से मुकाबला करने और उन्हें हराने के लिए पर्याप्त शक्तियाँ मौजूद हैं,

ब्रह्मांड की समस्त शक्तियां आपके अंदर मौजूद हैं, यदि आप उनका थोडा भी इस्तेमाल करें तो आप दुनिया के सबसे सफल इन्सान बन सकते हैं,अत: अपनी शक्तियों को पहचाने और उनका उपयोग करें अपने जीवन का सही उद्देश्य पाने में.


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Saturday, December 23, 2017

hindi story/ कहानी,तुलना नही talent पहचानना है जरूरी




        अमन और साहिल दोस्त थे, वे दोनों एक ही कक्षा, 8वीं में पढ़ते थे, साहिल पढने में अच्छा था और उसके मार्क्स अमन से अच्छे आते थे. अमन पढने में सामान्य था और उसके औसत मार्क्स ही आते थे. हालाँकि उसके अंदर अन्य कई talent मौजूद थे जैसे पेंटिंग बनाना, कविताएँ लिखना और खेलों में अच्छा होना आदि. लेकिन आज के समय में सारे लोग केवल मार्क्स के पीछे ही भाग रहे हैं, और अपने बच्चों के अन्य कोई भी  टैलेंट उन्हें दिखाई ही नही देते न ही वे देखना चाहते हैं, आज के समय में अधिकतर माँ बाप की तरह अमन और साहिल  दोनों के माता पिता भी उनकी दूसरे बच्चो से तुलना करके अपने बच्चों की कमियां उन्हें गिनाने में कोई कसर नही छोड़ते थे, अमन के माता पिता उसे हर बार कम मार्क्स आने पर उसकी तुलना साहिल और अन्य बच्चों से करने लगते और उसे कमतर महसूस करवाते.


       धीरे-धीरे अमन के अंदर आत्मविश्वास की कमी आने लगी वह अपने आप को ओरों की तुलना में अयोग्य समझने लगा और अंदर ही अंदर से हतोत्साहित और कुंठित होने लगा. यही हाल साहिल का भी था अच्छे मार्क्स लाने के बावजूद उसके माता पिता उसपर और अच्छा करने का दबाव डालते रहते और हमेशा no. 1 आने की नसीहत देते. बेहतर करने की दौड़ में हमारे देश के बच्चो का बचपन , उनकी इच्छाए और उनका talent कहीं खो सा गया है. और उसकी जगह भर दिया गया है तो सिर्फ तनाव.



     एक दिन अमन अपने वार्षिक परीक्षा की मार्क शीट लेकर पहुंचा उसका लटका हुआ मुंह देखकर उसके माता पिता को यकीन हो गया कि उसके या तो बहुत कम मार्क्स आयें हैं या वह फेल हो गया है, झट से उसकी मार्कशीट छीनकर उसके पिता ने उसके अंक देखे जो लगभग पहले की परीक्षाओं जैसे थे तो उनका पहला सवाल था -
           "साहिल के कितने मार्क्स आये हैं"
 अमन चुपचाप खड़ा रहा 2, 3  बार पूछने पर वह रोने लगा, उसके पिता को यकीन हो गया की जरूर साहिल के बहुत अच्छे मार्क्स होंगे तभी अमन कम मार्क्स लाने की डर से रो रहा है तो वह अमन पर चिलाने लगे,
         "तुम साहिल की तरह क्यों नही पढ़ते, उसकी तरह मार्क्स क्यों नहीं लाते आखिर तुम उसकी तरह क्यों नही बनते",
अमन और रोने लगा और बोला--
        "क्या आप सचमे चाहते हैं कि मुझे साहिल जैसे बनना चाहिए..... साहिल ने आत्महत्या कर ली है उसके मम्मी  पापा उसपर और अच्छे मार्क्स लाने के लिए बहुत दबाव डाल रहे थे जिससे वह कई दिनों से बहुत तनाव में था जिसके कारण वह फेल हो गया और उसने डर के मारे आत्महत्या कर ली"
 इतना कहकर अमन वहां से जाने लगा फिर वह अचानक रुका और अपने मम्मी पापा की तरफ देखकर बोला           "क्या आप वास्तव में चाहते हैं कि मैं साहिल जैसा बनू!"
 और वहां से चला जाता है.


       यह सब सुनकर उसके माता पिता हक्के बक्के रह जाते हैं अब उन्हें अहसास होता है कि वे कितनी बड़ी भूल कर रहे थे बच्चों पर दूसरों जैसा बनने और उनकी तुलना दूसरों के साथ करने से बच्चों पर कितना नकारात्मक असर पड़ता है, हर बच्चे में अपना टैलेंट होता है अपनी अलग विशेषता होती है उसे ओरों जैसा बनने की जरूरत नहीं होती, अगर साहिल के माता पिता ने उस पर अनावश्यक दबाव न डाला होता और उसको समझा होता तो आज साहिल जिन्दा होता. अमन के माता पिता को समय रहते उनकी गलती का अहसास हो गया लेकिन साहिल के माता पिता के लिए बहुत देर हो चुकी थी वह अपना बेटा खो चुके थे.



       दोस्तों हर इन्सान में कोई न कोई टैलेंट अवश्य होता है हर बच्चे में अपनी अलग खूबियाँ होती हैं जरूरी नहीं अगर वह पढाई में बहुत अच्छा नहीं है तो उसमे कोई टैलेंट ही नहीं है बल्कि हमारे सामने ऐसे कई लोग मौजूद हैं जो पढाई में कुछ खास नहीं थे बावजूद उसके उन्होंने बड़ी कामयाबियां हासिल की, जैसे चीन के सबसे अमीर आदमी जैक मा जो स्कूल में कई बार फ़ैल हुए, थॉमस एडिसन, विंस्टन चर्चिल, सचिन तेंदुलकर और भी बहुत से लोग जो पढाई  में बहुत अच्छे नही थे पर उन्होंने अपने टैलेंट को पहचाना और बहुत कामयाब हुए


       आज के समय में हर माता पिता की यह आदत बन गई है की वह अपने बच्चों की दुसरे बच्चों से तुलना करते रहते हैं, और एसी स्थिति में या तो वो अपने बच्चो को दुसरे बच्चों की तुलना में नीचा दिखाते हैं और उन्हें दुसरे बच्चों जैसा बनाने की नसीहत देते हैं या फिर उनके अच्छे performance से उनको दूसरों से तुलना करते हुए अनावश्यक तारीफे करने लगते हैं, दोनों ही स्थितियों का बच्चों पर बुरा प्रभाव पड़ता है और वे भी हर बात में खुद की तुलना करना सीख जाते हैं और उसी में फंसकर रह जाते हैं  अत: हर बच्चे का टैलेंट, इच्छा और उसकी ख़ुशी का ध्यान रखना जरूरी है तभी हर बच्चा अपने सही टैलेंट को पहचान पायेगा और अपनी जिन्दगी का सही मकसद पा सकेगा.





Sunday, December 10, 2017

Struggle- inspirational story in hindi /हिंदी कहानी, संघर्ष जिन्दगी में क्यों जरूरी है

 एक राजा था जो बहुत शक्तिशाली  था तथा जिसका बहुत बड़ा साम्राज्य था, उसके पास बहुत बड़ी सेना थी, और जो भी युद्ध उसने अब तक लडे सभी जीते.

अत: उसपर कोई भी आक्रमण करने की हिम्मत नही करता था, सभी राजा उससे डरने लगे और उससे डर के मारे मित्रता कर ली, कई साल हो गये किसी ने भी उसपर आक्रमण करने की हिम्मत नही की.



राजा को अपनी , शक्ति और सेना पर घमंड होने लगा, उसे यकीन होने लगा की कोई भी उसपर आक्रमण नहीं करेगा. 

धीरे-धीरे- राजा ने युद्ध का अभ्यास करना छोड़ दिया, उसकी सेना ने भी वर्षों तक न कोई युद्ध किया, ना ही कोई अभ्यास किया,

उसके हथियारों पर भी जंग लगने लगा और वे पुराने व बेकार होने लगे, लेकिन राजा ने इन सब पर कोई ध्यान नहीं दिया और नशे व जुए में डूबा रहने लगा. उसकी सेना भी अपनी ताकत खोने लगी.


एक बार अचानक किसी विदेशी राजा ने उस पर आक्रमण कर दिया, चूँकि कई सालों से उसने व् उसकी सेना ने कोई अभ्यास नही किया था, तो उस आक्रमण से वे सम्भल नहीं पाए,

और विदेशी राजा ने उसे आसानी से हराकर  बंदी बना लिया. तब उसे अपनी गलती का अहसास हुआ लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी.


    "जहाँ संघर्ष नहीं होता, वहाँ कोई प्रगति नहीं होती!" 

    "IF THERE IS NO STRUGGLE,
     THERE IS NO PROGRESS." 
                                             -- FREDERICK DOUGLASS


दोस्तों  कई लोग इसी प्रकार की गलती अपनी जिन्दगी में करते हैं, वे जब एक comfort जिंदगी पा लेते हैं और उन्हें अपनी जरूरत की चीजे मिलने लगती हैं तो वे संधर्ष करना छोड़ देते हैं,

और धीरे-धीरे उनकी जिन्दगी में जंग लगने लगता है यानी की वो एक ही प्रकार की घिसी पिटी जिन्दगी जीने लगते हैं और पूरी जिन्दगी वहीं अटक जाते है.



दोस्तों जब तक हम खुद को हर दिन पहले से बेहतर  बनाने के लिए संघर्ष नहीं करते, हम चाहे कितने भी बुद्धिमान हो, अमीर हों, शक्तिशाली हों, संघर्ष के बिना और लगातार सीखते रहने के बिना हमारी सारी चीजे हमसे छीण हो जाती हैं और हारने के chances बढ़ जाते है.


''लगातार मेहनत और संघर्ष से ही सामर्थ्य और तरक्की आते हैं."

 ''Strength and growth come only,
 through continuous effort and struggle.''
                                            --   Napoleon Hill 


लेकिन यदि हम लगातार खुद को बेहतर बनाते रहें, अपने ज्ञान की धार को तेज करते रहें और लगातार अच्छी चीजे सीखते रहें तो कोई भी हमे हरा नहीं सकता.



2.  हिंदी कहानी, खुद की नजरों में विजेता कैसे बने

4. प्रेरक पोस्ट चिंता छोड़ दें और आगे बढ़ें


Thursday, November 30, 2017

winner-best motivational/inspirational story in hindi, खुद की नजरों में विजेता कैसे बने

                             
एक बार एक Motivational speaker एक स्कूल में Speech देने पहुंचा. उसने speech सुरु करने से पहले छात्रों से पूछा, आप लोगों ने मैराथन दौड़ के बारे में तो सुना ही होगा क्या आप लोग बता सकते हैं इसमें कितने लोग भाग ले सकते हैं और कितने लोग जीतते हैं, 

इस पर एक छात्र ने कहा इसमे सैकड़ों लोग भाग ले सकते हैं जबकि जीतता एक ही है.


Speaker ने कहा- यकीनन वहां बहुत सारे लोग भाग ले सकते हैं, लेकिन क्या winner एक ही होता है?  मैं भी पहले यही सोचता था लेकिन जब मैं खुद एक मैराथन देखने गया तो मेरा अनुभव कुछ और था,


यकीनन वहां दुनिया की नजर में एक ही विजेता था, लेकिन मैं मैराथन के बाद कुछ लोगों से मिला जो विजेता नही थे और उनसे उनके अनुभव के बारे में पूछा -



एक ने बताया- "मुझे विजेता जैसे अनुभव हो रहा है, मैंने जब पिछली बार मैराथन में भाग लिया था तो उसे पूरा नही कर पाया था लेकिन इस बार मैंने उसे पूरा करने की सोची और एसा किया भी तो मैं खुद के लिए एक विजेता हूँ."


दुसरे ने कहा- "मैंने पहले भी मैराथन में भाग लिया था  लेकिन उसे पूरा करने में मुझे 1 घंटे का समय लगा था जबकि इस बार मुझे केवल 50 मिनट का समय लगा है तो  मुझे विजेता जैसी ख़ुशी अनुभव हो रही है."



तीसरा बोला-  "मैंने मैराथन में कभी भाग नही लिया था, इस बार जब मैं  इसमे दौड़ा तो ये मेरे लिए एक अलग अनुभव था और मुझे बहुत ख़ुशी हुई."



चौथा बोला- मेरा 5 साल का बेटा मुझे इस दौड़ में देखना चाहता था जब मैं इसमें दौड़ रहा था तो मेरा बेटा बहुत खुस हो रहा था उसकी ख़ुशी ही मेरे लिए जीत के समान है."



पांचवा बोला- "मैं इस दौड़ में केवल Enjoyment और एक अलग  Experience के लिए सामिल हुआ था जो की मैंने हासिल किया तो खुद में विजेता हूँ.



इसी प्रकार बहुत से लोग अलग अलग उदेश्यों के लिए दौड़ में समिल थे और अपने तरीके से दौड़ के मजे ले रहे थे, और खुद के लिए एक विजेता थे.

जरूरी नहीं आपको जीतने के लिए दूसरों को हराना पड़े, खुद के रिकॉर्ड तोड़ते हुए आगे बढ़ते रहना सफलता का सबसे बढिया तरीका है.


ये जिन्दगी भी एक मैराथन की तरह है इसमे कोई भी विजेता हो सकता है कोई भी जीत सकता है जरूरी नही सभी का उदेश्य एक ही हो, हर किसी का जिन्दगी में अपना अलग उदेश्य हो सकता है, 

लेकिन सबसे जरूरी हैं हर समय खुश रहना और जिंदगी को मजे से जीना.



   दोस्तों  हमारा मुकाबला दुसरो से नही होता बल्कि खुद से होता है यदि हम लगातार अपने ही रिकॉर्ड तोड़ते रहें तो एक दिन अवश्य बहुत बड़ी सफलता हासिल कर लेंगे.



अन्य प्रेरक कहानी यहाँ पढ़ें.....

hindi story/ कहानी,तुलना नही talent पहचानना है जरूरी




Sunday, November 26, 2017

happiness - Inspirational story in hindi/ जो कुछ आपके पास है उसमे खुश रहें.



"सबसे महत्वपूर्ण है, अपनी जिन्दगी को enjoy कीजिये, हमेशा खुश रहिये,

यही सब महत्व रखता है!"
                                                             - Audrey Hepburn
                                                                                                                       


                              
दोस्तों जिंदगी बेहद खूबसूरत चीज का नाम है, लेकिन शिकायते करने के लिए यह बहुत छोटी पड़ जाती है,



अक्सर हमारे पास बहुत सारी चीजे होती हैं जो हमारी जरूरत के हिसाब से काफी हैं,जैसे परिवार, दोस्त, पैसा, घर, खुद की योग्यता, health आदि ... 



और हम उन चीजों में ही खुश रहकर जिन्दगी को बेहतर बना सकते हैं, 

लेकिन अधिकतर लोगों का ध्यान अपने पास मौजूद चीजों पर न होकर उन चीजों पर होता है जो उनके पास नहीं होती, जैसे बड़ी गाड़ी, बड़ा घर, दूसरों की तरह ढेर सारे पैसे, और अच्छी जॉब आदि... 



और उन्हीं चीजों पर फोकस करके वे लोग हर समय परेशान रहते हैं और शिकायते करते रहते हैं, खुद की तुलना दूसरों से करते हैं और रोते रहते हैं,


वे उन खुशियों व सम्मान को भी नजरंदाज़ कर देते हैं जो उनके पास है, और फिर कई बार उनसे वे चीजे भी छिन जाती हैं जो उनके पास पहले से मौजूद थीं, निम्न कहानी में हम देखेंगे की कैसे एक सेनापति के अहंकार की वजह से उसका मान सम्मान सब कुछ छिन गया, आएये ये रोचक कहानी पढ़ते हैं-




सेनापति की मुर्खता 

एक राज्य का सेनापति बहुत ही सम्मानित व्यक्ति था. उसके कामों से राजा तथा राज्य की जनता सभी बड़े प्रभावित और खुश थे और उसका बड़ा सम्मान करते थे. 


वह बहुत ही खुस व्यक्ति था. जहाँ भी वह जाता, लोग उसके सम्मान में अपना सर झुकाते थे.



एक दिन वह नगर से होकर गुजर रहा था, सभी लोगों ने उसके अभिवादन  में अपना सर झुकाया, 


किन्तु एक व्यक्ति ने ऐसा नही किया. जब सेनापति को यह बात पता चली तो वह बहुत क्रोधित हुआ, वह चाहता था की हर कोई उसके सम्मान में झुके किन्तु जब एक व्यक्ति ने एसा नही किया तो उसे यह बात पसंद नहीं आई,  



सेनापति दिन रात उसी के बारे में सोचने लगा, वह उस व्यक्ति को सबक सिखाना चाहता था, उसे यह बात सहन नही हो रही थी कि कोई व्यक्ति उसके सामने क्यों नहीं झुका. 



पूरे राज्य में हजारों लाखों लोग थे जो उसके सम्मान में सर झुकाते थे लेकिन उन सब को भूलकर उसका ध्यान सिर्फ उस व्यक्ति पर  केन्द्रित हो गया जो उसके सामने नहीं झुका.




धीरे-धीरे वह नफरत और बदले की भावना से भर गया और उस व्यक्ति को सबक सिखाने के बारे में सोचने लग गया. 


इससे उसके अन्य कामों पर भी बुरा प्रभाव पड़ने लगा और वह अनेक गलतियाँ करने लग गया, जिस कारण राज्य को नुकसान होने लगे, इससे राजा और प्रजा दोनों के बीच उसका सम्मान कम होने लग गया, और अंत में राजा ने उसे सेनापति के पद से हटा दिया.
इस बात से उसको बड़ा आघात पहुंचा, वह अंदर ही अंदर से टूटने लगा, अब कोई भी व्यक्ति उसका सम्मान नही करता था, 


वह कई सालों तक एक असंतुष्ट जीवन जीता हुआ भटकता रहा और अंत में मानसिक बीमारी के कारण उसकी मृत्यु हो गई.




निष्कर्ष 



दोस्तों जो लोग अपने पास मौजूद चीजों, पदों और लोगों की कीमत नहीं समझते और जो उनके पास नही है उसके पीछे भागते रहते हैं उनका यही हश्र होता है. 



अक्सर हमारे पास एक खुश जीवन जीने के लिए सब कुछ होता है लेकिन हम और ज्यादा के लालच में उन चीजो का मजा भी नही ले पाते हैं जो हमारे पास हैं. 




"यदि मैं  मेरी विकलांगता के लिए गुस्सा करूं तो ये मेरे लिए समय व्यर्थ गवाने जैसे होगा! यदि आप हमेशा शिकायते करते रहोगे और क्रोधित रहोगे तो लोगों के पास आपके लिए समय नहीं होगा!" 

                                                                                                              -स्टीफन हॉकिंग 


अपने जीवन को और बेहतर बनाने की कोशिस करना बहुत अच्छी बात है लेकिन जब हम वर्तमान में जो भी हमारे पास है उसमे खुश नही हैं तो भविष्य में खुश रहेंगे इसकी क्या गारंटी है. 



यकीनन आपके पास वह सब नही होगा जो आप चाहते होंगे लेकिन वह सब होगा जो आपके जीवन जीने के लिए आवश्यक है. 

Saturday, September 23, 2017

The Power of positive Encouragement by story in hindi/उत्साहवर्धन की शक्ति

       
उत्साहवर्धन की शक्ति


आज हम बात करेंगे उत्साहवर्धन के बारे में. दोस्तों जब भी कोई व्यक्ति किसी काम में कोई गलती कर देता है तो लोग तुरंत उसकी आलोचना करने लग जाते हैं, लेकिन जब वही व्यक्ति कोई अच्छा काम करता है वही लोग उसकी तारीफ करना भूल जाते हैं.

आपने अक्सर महसूस किया होगा जब भी आप कोई काम अच्छे से करते हैं तो कोई उसपर ध्यान नहीं देता या लोग उसपर ध्यान देना ही नहीं चाहते, लेकिन वे आपकी एक गलती का इंतजार  करते हैं की कब उन्हें आपकी आलोचना का मौका मिले,


सच तो यह है की कई बार हम खुद भी दूसरों की तारीफ करना भूल जाते हैं उनके अच्छे कामों की और उनके अच्छे गुणों की तारीफ करना भूल जाते हैं लेकिन गलती करने पर आलोचना के लिए तत्पर रहते हैं, यही गलती हम कई बार खुद के साथ भी करते हैं, जब हम कुछ अच्छा करते हैं तो उसके लिए खुद को ईनाम देना भूल जाते हैं जबकि खुद की गलती करने पर अपने आप को कई दिनों तक कोसते रहते हैं, जिससे हमारे अंदर से किसी काम को करने का उत्साह खत्म होने लगता है,


दोस्तों खुद को और दूसरों को गलती करने पर माफ़ करना सीखें, अपनी गलतियों से सीखें और आगे बढ़ जाएँ, अच्छे काम के लिए खुद को कोई reward दें, (जैसे कोई स्वादिष्ट चीज खाना, कोई म्यूजिक सुनना या अपना पसंदीद खेल खेलना आदि..) और जब कोई आपका कोई अपना या जान पहचान का व्यक्ति कोई अच्छा काम करे तो उसकी तारीफ करके उसका हौसला बढ़ाना न भूलें.


उत्साहवर्धन में बड़ी ताकत होती है, जो लोगों को किसी काम को और बेहतर ढंग से करने के लिए प्रेरित करती है, जरा सोचकर देखिये जब कोई आपकी तारीफ करता है तो आपको कैसा महसूस होता है, यदि कोई आपसे कहे की आप बहुत समझदार हैं, बुद्धिमान हैं या बहुत अच्छे इन्सान हैं तो आपको कितना अच्छा महसूस होता है, लेकिन जब कोई आपकी बुराई करे की आप किसी काम में अच्छे नहीं हैं, आप मूर्खों जैसे काम करते हैं, या आप जिन्दगी में कुछ नहीं कर पाएंगे तो आपको कैसा महसूस होता है! यकीनन बहुत बुरा,

कभी भी किसी का हौसला तोड़ने की कोशिस मत कीजिये हमेशा दूसरों का उत्साह बढाइये,

किसी की तारीफ करने से उसके काम पर क्या अंतर पड़ता है इसे एक छोटी कहानी के माध्यम से समझते हैं,



     ‘एक दिन Mr. गुप्ता ने अखवार लेने के लिए जैसे ही दरवाजा खोला तो उन्होंने देखा कि दरवाजे के सामने एक प्यारा पपी ( कुत्ते का बच्चा) खड़ा था, जो उनका अखवार उन्हें देने के लिए मुंह में लिए हुए था, 

यह देखकर Mr. गुप्ता बहुत खुस और आश्चर्यचकित हुए और पपी के लिए एक रोटी लेकर आये, छोटा कुत्ता रोटी लेकर चला गया. 

दूसरे दिन Mr. गुप्ता ने फिर से दरवाजा खोला तो वही कुत्ता फिर से दरवाजे के सामने खड़ा था, आज उसके मुंह में 4 अखवार थे, वह पड़ोसियों के अखवार भी उठा लाया था, उसने सोचा जब 1 अखवार के लिए 1 रोटी मिलती है तो आज मुझे 4 रोटियां मिलेंगी.’



     दोस्तों इंसानों का स्वाभाव भी एसा ही होता है, जब कोई हमारी तारीफ करता है तो हम उस काम को और भी अच्छे से करने लगते हैं.

happiness - Inspirational story in hindi/ जो कुछ आपके पास है उसमे खुश रहें.


आप जो पाना चाहते हैं वही दूसरों को दें, यकीनन आप दूसरों से हौसला अफजाई, तारीफ और खुशियाँ पाना चाहते हैं तो फिर आपको दूसरों को भी वही देना पड़ेगा और यकीन मानिये जो आप दूसरों को देंगे उससे वे तो प्रेरित होंगे ही आप के पास वे चीजें वापस लौटकर जरूर आएँगी.



     अत: हमेशा दूसरों के अच्छे कामों की तारीफ करें. एक बच्चे की तारीफ करें जब वह कहना माने, एक स्टूडेंट की तारीफ करें जब वह अच्छा प्रदर्शन करे, एक व्यक्ति की तारीफ करें, जब वह किसी की मदद करे etc... 

गलती ढूँढने की बजाये किसी की अच्छाई ढूंढे, और अच्छे कामों की तारीफ करें. जब किसी की तारीफ की जाती है तो उसका उत्साह कई गुना बढ़ जाता है और वह उस काम को और भी मन से करने लगता है, दूसरी ओर जब किसी की आलोचना की जाती है तो कार्य के प्रति उसकी इच्छा कम या खत्म हो जाती है, और उसका आत्मविश्वास भी कम हो जाता है, 

जिससे आने वाले समय में  कार्य और भी खराब हो जाता है, तारीफ करने से सभी (तारीफ करने वाले और सुनने वाले दोनों) के अंदर  सकारात्मकता फैलती है जबकि आलोचना करने से नकारात्मकता फैलती है. अत: आज से ही लोगों की तारीफ करना सुरू कर दीजिये.


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the hidden power in human-3 short inspirational stories in hindi/इन्सान की छुपी हुए शक्तियाँ


Monday, September 18, 2017

motivational story आपके अंदर की छुपी हुई शक्ति


    
    छुपी हुई शक्ति 
     
                                                                



   एक लड़का था, उसे खेलने- कूदने का बड़ा शौक था, परन्तु पैरों में जन्मजात कमी के कारण वह तेज नहीं दौड़ पाता था. वह स्कूल में हर दौड़ में भाग लेता लेकिन हर बार अन्तिम स्थान पर रहता. वह बहुत प्रैक्टिस करता फिर भी तेज नही दौड़ पाता, धीरे-धीरे वह अंदर से टूटने लगा, और महसूस करने लगा कि वह कभी तेज नही दौड़ पायेगा.



    हर दिन वह स्कूल से घर दौड़ के जाता ताकि उसकी दौड़ तेज हो सके. स्कूल और  घर के बीच जंगल था. एक दिन वह घर जा रहा था, वह अकेला था, जंगल में अचानक उसने झाड़ियों से कुछ आवाज सुनी, पीछे मुडकर देखा तो वह चौंक उठा, उसके सामने एक भालू खड़ा था, जो बहुत गुस्से में लग रहा था, और धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ रहा था, बिना समय गवाये वह तेजी से दौड़ने लगा, भालू भी उसके पीछे दौड़ने लगा वह और तेज दौड़ने लगा और अपनी जान बचाकर घर पहुंच गया. वह बहुत डरा हुआ था, 



    
    कुछ समय बाद जब उसने होश सम्भाला, तो उसे कुछ अच्छा महसूस हुआ, क्योंकि आज वह और दिनों की तुलना में काफी जल्दी घर पहुच गया था, और दिन उसी दूरी को वह 15 मिनट में तय करता था जबकि आज उसे मात्र 7 मिनट का समय लगा, उसके लिए यह चमत्कार से कम नही था, अब तक वह सोचता था कि वह कभी तेज नही दौड़ सकता, लेकिन आज उसे अपनी असली शक्ति का आभास हो गया कि न केवल वह दौड़ सकता है बल्कि वह जीत भी सकता है.




   अगले ही दिन स्कूल में दौड़ की प्रतियोगिता थी, उसने प्रतिभाग किया, वह अपनी पूरी क्षमता से दौड़ा और न केवल जीता बल्कि उसने अन्य प्रतिभागियों को काफी पीछे छोड़ दिया, इस प्रकार उसने असम्भव लगने वाले काम को कर दिखाया, अब उसे अपनी छुपी हुई शक्ति का आभाश हो गया.



    दोस्तों हर इन्सान के अंदर छुपी हुई शक्तियां किसी खजाने के समान होती हैं, लेकिन हम उन शक्तियों को देख नही पाते और सोचते रहते हैं की मेरे अंदर कोई योग्यता नही है, और अपने अंदर के शक्तियों के खजाने को बर्बाद कर देते है. आपने कई बार महसूस किया होगा कि आप कोई काम कई दिनों तक नही कर पाते लेकिन जब उसकी last date आ जाती है तो वही काम बहुत तेजी से करके उसे कुछ ही घंटो या मिनटों में पूरा कर लेते हैं, वह भी बेहतर ढंग से, ये हमारी अंदर की छुपी हुई शक्ति होती है जो तब बाहर निकलती है जब हमे उसकी जरूरत होती है और हम उसका इस्तेमाल करना चाहते हैं, अत: अपने अन्दर की शक्तियों को पहचाने और अपने जीवन के उदेश्य को हासिल करने में उसका इस्तेमाल करें |



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