
एक बार एक motivational Speaker एक स्कूल में छात्रों को speech देने पहुचें, वे छात्रों को इन्सान के अंदर छुपी हुए शक्तियों के बारे में बताने वाले थे,
वे बोले हर व्यक्ति में चाहे वह कोई भी हो, कोई बच्चा हो या बड़ा, अमीर हो या गरीब, शहर में रहता हो या गाँव में, उसमे आंतरिक शक्तियाँ होतीं हैं, आपने कई बार महसूस किया होगा की कोई काम आप नहीं कर पाएंगे लेकिन जब आपको वह काम करना अनिवार्य हो जाये तो आप उसे बहुत ही अच्छे से कर पायें होंगे,
ऐसी ही कुछ कहानियों के माध्यम से मैं आपको समझाना चाहता हूँ की किस प्रकार हमारी छुपी हुई शक्तियां सही समय पर हमारे काम आती हैं,
1.पहली कहानी--
एक छात्र सौरभ जो स्टेज पर जाने से काफी डरता था, किसी स्टेज पर जाकर कुछ बोलना तो उसके लिए असम्भव सा था, वह कभी नहीं सोच सकता था की वह किसी स्टेज पर जाकर कुछ बोल पायेगा, ऐसी कल्पना से ही वह डर जाता था कोई उसे आगे स्टेज पर जाने को न बोल दे इसलिए वह लाइन में पीछे बैठता था,
एक छात्र सौरभ जो स्टेज पर जाने से काफी डरता था, किसी स्टेज पर जाकर कुछ बोलना तो उसके लिए असम्भव सा था, वह कभी नहीं सोच सकता था की वह किसी स्टेज पर जाकर कुछ बोल पायेगा, ऐसी कल्पना से ही वह डर जाता था कोई उसे आगे स्टेज पर जाने को न बोल दे इसलिए वह लाइन में पीछे बैठता था,
एक दिन स्कूल में कोई प्रोग्राम चल रहा था, कुछ अध्यापकों व अन्य लोगों ने अपने विचार रखे, अब एक शिक्षक छात्रों के नाम से उन्हें स्टेज पर बुला रहे थे और उन्हें अपने विचार रखने के लिए कह रहे थे, सौरभ इस बात से निश्चिन्त था की उसका नाम नहीं आएगा क्योंकि उसने अपना नाम स्टेज के लिए दिया ही नहीं है,
लेकिन 2 छात्रों के बाद अचानक शिक्षक ने सौरभ का नाम पुकारा, पहले तो उसे लगा की किसी और को बुलाया जा रहा है लेकिन जब उसने देखा सब लोग उसी की तरफ देख रहें हैं, तो वह हडबडा गया, उसे समझ नहीं आया की उसे क्यों बुलाया जा रहा है,
शिक्षक के बार बार उसका नाम बुलाने से उसे उठना पड़ा, और जैसे तैसे करके वह स्टेज पर पहुंच गया, वह डरा हुआ था लेकिन किसी तरह उसने खुद के डर को नियंत्रित किया, और अपने अनुभव के अनुसार बोलने लगा, जैसे ही उसने बोलना सुरु किया सारे लोग उसे ध्यान से सुनने लगे, जब उसने अपनी बात खत्म की तो उसके लिए खूब तालियाँ बजने लगीं, उसे खुद में यकीन नहीं था की वह इतना अच्छा बोल सकता है, शिक्षकों द्वारा उसकी खूब तारीफ की गई, और अन्य छात्र भी उसकी सराहना कर रहे थे,
उसके अंदर वह शक्तियां पहले से मौजूद थीं, की वह स्टेज पर न सिर्फ बोल सकता है बल्कि बहुत अच्छा बोल सकता है, लेकिन उसके डर ने कभी उन शक्तियों को बाहर नहीं आने दिया, लेकिन जब उसके लिए यह करना अनिवार्य हो गया तो उसकी शक्तियां खुल के बाहर आई और वह वो काम कर गया जिसकी किसी ने उम्मीद भी नही की थी.
2. दूसरी कहानी--
राहुल नाम का एक बच्चा काफी डरपोक किस्म का था, हर कोई उसे डरपोक डरपोक कहकर चिढाता था, हर चीज में उसका डर साफ़ दीखता था, कोई उम्मीद नहीं कर सकता था की वह किसी भी तरह के डर का सामना कर सकता है,
राहुल नाम का एक बच्चा काफी डरपोक किस्म का था, हर कोई उसे डरपोक डरपोक कहकर चिढाता था, हर चीज में उसका डर साफ़ दीखता था, कोई उम्मीद नहीं कर सकता था की वह किसी भी तरह के डर का सामना कर सकता है,
एक दिन वह अपनी छोटी बहन के साथ स्कूल जा रहा था, रास्ते में उसकी बहन पर भालू ने हमला कर दिया, भालू उसकी बहन को मार ही डालता, लेकिन राहुल ने बड़ी बहादुरी दिखाते हुए भालू का सामना किया उसने अपनी बहन को पीछे धकेलकर खुद भालू को भगाने लगा उसने एक डंडा उठाया और भालू पर प्रहार कर दिया, उसकी हिम्मत देख भालू पीछे हट गया और वहाँ से भाग गया, जब लोगों ने उसके बारे में सुना तो उसकी खूब तारीफ हुई, बाद में उसे स्कूल से वीरता पुरस्कार दिया गया.
हिंदी कहानी, खुद की नजरों में विजेता कैसे बने
3. तीसरी कहानी--
एक अन्य वाक्ये के अनुसार एक लड़का कई बार एक 7 फीट की दीवार को पार करने का प्रयास करता था लेकिन कभी भी वह उसे पार नहीं कर पाया, एक दिन वह उस दीवार से कुछ दूरी पर था, की अचानत उसे अहसास हुआ की एक जर्मन सैफर्ड कुत्ता उसकी तरफ गुस्से में तेजी से दौड़ता हुआ आ रहा है, उसके पास कहीं भी भागने की जगह नहीं थी सिवाय उस 7 फीट की दीवार को पार करने के अलावा,
उसके पास ज्यादा सोचने का भी टाइम नहीं था तो उसने बिना ज्यादा समय गवाएं, तेजी से भागना सुरु किया और अपनी पूरी शक्ति से वह दीवार लांघने में कामयाब हुआ, वह कुत्ते से बचके जहाँ काफी खुश था वहीं उस दीवार को लांघकर काफी आश्चर्यचकित.
हमारी छुपी हुई शक्तियां हमारी जरूरत के समय हमारे काम आती हैं यदि हमें इन छुपी हुई शक्तियों का अहसास हो जाये तो हम इनका इस्तेमाल करके खुद के बड़े से बड़े लक्ष्यों को भी हासिल कर सकते हैं,
winner-best motivational/inspirational story in hindi, खुद की नजरों में विजेता कैसे बने
आपने Nick Vujicic का नाम सुना होगा,वो ऑस्ट्रेलिया के रहने वाले हैं, निक का जन्म बिना हाथ पैरों के हुआ था, बिना हाथ पैरों के किसी इन्सान को कितना संघर्ष झेलना पड़ सकता है, इसका अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता,
बचपन से ही निक को बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ा, स्कूल में सारे बच्चे उसपर हंसते थे, उसकी अपंगता का मजाक उड़ाते थे, कोई उससे दोस्ती नहीं करता था, बचपन से ही निक तनाव में रहने लगे थे, कोई बच्चा अपने हंसने खेलने की उम्र में इतना असहाय था की उसने तनाव में आकर 11 साल की उम्र में आत्महत्या करने की भी कोशिस की,
जैसे जैसे निक बड़े हो रहे थे उन्होंने खुद के जीवन के उद्देश्य के ढूँढना सुरु किया,उन्होंने खुद पर विश्वास करना सुरु किया, उन्हें अहसाह हुआ की उनके जीवन का भी बहुत महत्व है, उन्होंने अपनी आंतरिक शक्तियों को पहचाना और खुद को बेहतर बनाने में उसका इस्तेमाल किया.
निक आज दुनिया के सबसे बेहतर motivational स्पीकर में से एक हैं, वे बहुत ही अच्छे स्वीमर और लेखक हैं, वे कई स्पोर्ट्स भी खेलते हैं,
आज निक लोगों को motivate करते हैं, उन्हें जिन्दगी में आगे बढने के लिए प्रेरित करते हैं, वो कहते हैं उम्मीद खोना, हाथ पांव खोने से ज्यादा बुरा है,
अब वो शादीशुदा हैं और उनके 2 बच्चे भीं हैं, वे अपनी जिन्दगी से खुश और संतुष्ट है,
कोई भी समस्या इतनी बड़ी नहीं हो सकती जो आपको आगे बढने से रोक सके, आपके अंदर उन सब समस्याओं से मुकाबला करने और उन्हें हराने के लिए पर्याप्त शक्तियाँ मौजूद हैं,
ब्रह्मांड की समस्त शक्तियां आपके अंदर मौजूद हैं, यदि आप उनका थोडा भी इस्तेमाल करें तो आप दुनिया के सबसे सफल इन्सान बन सकते हैं,अत: अपनी शक्तियों को पहचाने और उनका उपयोग करें अपने जीवन का सही उद्देश्य पाने में.
ये भी पढ़ें...
No comments:
Post a Comment